@ लेह लद्दाख :-
सामाजिक कार्यकर्ता एवं शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक की जारी भूख हड़ताल को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिका में केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर वांगचुक के जीवन, स्वास्थ्य और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश देने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने अदालत से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील करते हुए कहा है कि लंबे समय से जारी भूख हड़ताल के कारण उनकी स्वास्थ्य स्थिति गंभीर हो सकती है।

याचिका में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रत्येक नागरिक को जीवन और स्वास्थ्य की सुरक्षा का अधिकार प्राप्त है। ऐसे में सरकार का दायित्व है कि भूख हड़ताल के दौरान सोनम वांगचुक को समुचित चिकित्सकीय सुविधा, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
याचिकाकर्ता ने अदालत से यह भी अनुरोध किया है कि सोनम वांगचुक को तत्काल किसी उपयुक्त अस्पताल में भर्ती कराकर विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में रखा जाए। याचिका में यह भी कहा गया है कि यदि चिकित्सकीय दृष्टि से आवश्यक हो और उनकी जान को गंभीर खतरा उत्पन्न हो, तो अदालत कानून के अनुरूप उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में पोषण (फोर्स-फीडिंग) उपलब्ध कराने पर भी विचार करे।
याचिका में यह तर्क दिया गया है कि किसी भी व्यक्ति के लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन उसके जीवन और स्वास्थ्य की रक्षा भी राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी है। इसलिए अदालत से अनुरोध किया गया है कि संबंधित अधिकारियों को आवश्यक चिकित्सा, एम्बुलेंस, स्वास्थ्य निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए जाएं।
फिलहाल दिल्ली हाई कोर्ट से इस जनहित याचिका पर शीघ्र सुनवाई का अनुरोध किया गया है। अदालत के समक्ष मुख्य प्रश्न यह रहेगा कि शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और राज्य के जीवन संरक्षण के दायित्व के बीच संतुलन किस प्रकार स्थापित किया जाए। मामले की अगली सुनवाई में अदालत केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और संबंधित अधिकारियों से उनका पक्ष भी जान सकती है।

