@ गांधीनगर गुजरात :-
26 जनवरी, 2001 को आए विनाशकारी भूकंप ने कच्छ को इस हद तक तबाह किया कि हरेक के मन में प्रश्न था कि कच्छ फिर से उठ खड़ा हो पाएगा या नहीं। हालाँकि गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में इस प्रदेश की ऐसी कायापलट हुई कि कच्छ विकास, आत्मनिर्भरता तथा सहकारी समृद्धि का उत्तम उदाहरण बन गया है। उनके नेतृत्व में कच्छ पर्यटन, कृषि, सहकारिता जैसे क्षेत्रों में अग्रसर जिला बना है। आज मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में कच्छ की विकास यात्रा को और गति मिली है।

उल्लेखनीय है कि भूकंप के बाद कच्छ के सहकारिता क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन लाने में ‘ कच्छ जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ’ यानी सरहद डेयरी की उल्लेखनीय भूमिका रही है। 2009 में वलमजी हुंबल द्वारा स्थापित सरहद डेयरी कच्छ की सबसे बड़ी सहकारी संस्था है और जिले के पशुपालकों के लिए आजीविका का महत्वपूर्ण स्रोत है।
सरहद डेयरी 80,000 दूध उत्पादकों से प्रतिदिन 5.5 लाख लीटर दूध प्राप्त करती है
सरहद डेयरी 900 से अधिक सहकारी मंडलियों के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 80,000 दूध उत्पादकों से लगभग 5.5 लाख लीटर दूध एकत्र करती है। डेयरी में प्रतिदिन 4 लाख लीटर दूध की प्रोसेसिंग होती है और यहाँ 300 टन क्षमता का पशु आहार (कैटल फीड) प्लांट भी है। इसके अतिरिक्त; डेयरी द्वारा प्रतिदिन 50,000 लीटर आइसक्रीम भी बनाई जाती है, जिसमें सर्वाधिक उत्पादन 3.38 लाख लीटर प्रतिदिन दर्ज हुआ है। डेयरी द्वारा पशुपालकों को प्रतिदिन अनुमानित 3 करोड़ रुपए का भुगतान किया जाता है। वर्ष 2024-25 के दौरान सरहद डेयरी ने 1,200 करोड़ रुपए से अधिक का ऐतिहासिक टर्नओवर हासिल किया है, जो वार्षिक 9.09 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। सरहद डेयरी हरियाणा, तेलंगाना तथा महाराष्ट्र जैसे राज्यों में अमूल के डेयरी प्लांट को भैंस के शुद्ध दूध की आपूर्ति करने में भी अग्रसर है।
सरहद डेयरी में है भारत का प्रथम कैमल मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट
कच्छ के रण का सफेद सोना माने जाने वाले ऊँटनी के दूध में भरपूर खाद्य खनिज तत्व होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायी हैं और रोगप्रतिकारक शक्ति में वृद्धि करते हैं। भारत का सर्वप्रथम ऊँटनी के दूध को दुर्गंधमुक्त करने का प्रोसेसिंग प्लांट कच्छ में यानी सरहद डेयरी के पास है, जो 16 जनवरी 2019 से कार्यरत है। ऊँटनी के दूध के लिए प्राथमिक ऑर्गेनिक सर्टिफिकेट भी सरहद डेयरी ने प्राप्त किया है। कच्छ जिले में रापर, नखत्राणा, गढशीशा तथा कोटडा आथमणा; इन चार कलेक्शन केन्द्रों के माध्यम से ऊँटनी के दूध का अमूल पैटर्न के अनुसार कलेक्शन किया जा रहा है। वर्ष 2024-25 के दौरान ऊँटनी के दूध का दैनिक संग्रहण 4,754 लीटर हुआ है। ऊँटनी का दूध जमा कराने वाले ऊँटपालकों को वार्षिक 8,72,83,440 रुपए का भुगतान किया गया है, जिससे 350 से अधिक ऊँटपालक परिवारों को लाभ हुआ है।
इसके अतिरिक्त; समग्र भारत में ऊँटनी के दूध की राजभोग फ्लेवर की आइसक्रीम केवल सरहद डेयरी में ही बनाई जाती है। 22 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा इस आइसक्रीम प्लांट का उद्घाटन किया गया था और इस प्लांट द्वारा केवल एक ही वर्ष में 80 वेराइटी लॉन्च की गई हैं। वर्ष 2024-25 में कुल 24.52 लाख लीटर आइसक्रीम का उत्पादन किया गया और अधिकतम् डिसपैच 58,000 लीटर दर्ज हुआ है।
सरहद डेयरी को मिली है वैश्विक पहचान
जनवरी 2022 में गांधीनगर में इंडियन डेयरी एसोसिएशन (आईडीए) कॉन्फ्रेंस आयोजित हुई थी; जिसमें सरहद डेयरी ने भाग लिया था, तो इंटरनेशनल डेयरी फेडरेशन (आईडीएफ) द्वारा केरल राज्य के कोच्चिं में विश्व में पहली बार आयोजित रीजनल डेयरी कॉन्फ्रेंस 2024 में विश्व में ऊँट तथा ऊँटनी के विषय पर आयोजित एक महत्वपूर्ण सत्र में सरहद डेयरी द्वारा एशिया प्रशांत क्षेत्र में ऊँटनी के दूध की प्रोसेसिंग तथा उत्पादों में किए गए उत्कृष्ट कामकाज का विश्व स्तर पर संज्ञान लिया गया।
इसी प्रकार; सरहद डेयरी को 2025 में दुबई में आयोजित विश्व के सबसे बड़े फूड शो ‘गल्फ फूड एक्सपो’ में भी वैश्विक स्तर पर पहचान मिली, जहाँ अमूल के स्टॉल पर ऊँटनी के दूध के उत्पादकों ने विशेष आकर्षण जमाया। सरहद डेयरी को उसके प्रशंसनीय कामकाज के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले हैं; जिनमें सामाजिक विकास तथा इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए FOKIA Award 2014, कच्छ डेयरी क्षेत्र के विकास के लिए रोटरी क्लब वॉकेशनल एक्सीलेंस अवॉर्ड 2017, एग्रीटेक में उत्कृष्टता के लिए FOKIA Award 2024 तथा टिकाऊ प्रदर्शन के लिए VNM TV की ओर से ग्रीन वर्कप्लेस अवॉर्ड 2025 शामिल हैं।
‘सहकार से समृद्धि’ की परिकल्पना को साकार कर रही है सरहद डेयरी
‘सहकार से समृद्धि’ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की एक दूरदर्शी पहल है। इस कार्यक्रम अंतर्गत सरहद डेयरी ने कच्छ जिला मध्यस्थ सहकारी (केडीसीसी) बैंक में 900 दूध मंडलियों तथा 31,067 पशुपालकों की बैंक खाते खोलने में सहायता की है। बैंकिंग को अधिक सरल बनाने के लिए किसानों को रुपे कार्ड दिए गए हैं और 438 दूध मंडलियों को माइक्रो एटीएम प्राप्त हुए हैं।
