विद्यालयों में प्रदान की जाने वाली शिक्षा की गुणवत्ता का मूल्यांकन

@ नई दिल्ली :-

शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची के अंतर्गत आती है, जिसमें अधिकांश विद्यालय और उच्च शिक्षा संस्थान राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। शिक्षा मंत्रालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 द्वारा निर्देशित है, जो शिक्षार्थियों के समग्र विकास और मूल्यांकन की ऐसी पद्धतियों पर बल देती है, जिनमें रटने और केवल अंतिम (समापनात्मक) परीक्षाओं से हटकर नियमित, निर्माणात्मक तथा दक्षता-आधारित मूल्यांकन को बढ़ावा दिया जाता है। यह पद्धति सीखने, आलोचनात्मक चिंतन, वैचारिक समझ तथा शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं में निरंतर सुधार को प्रोत्साहित करती है।

एनईपी 2020 की सिफारिशों के अनुपालन में, शिक्षा मंत्रालय द्वारा 8 फ़रवरी 2023 को राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र, परख (समग्र विकास हेतु ज्ञान का प्रदर्शन मूल्यांकन, समीक्षा और विश्लेषण) की स्थापना की गई। परख विद्यालयों में छात्र मूल्यांकन और आकलन के लिए मानदंड, मानक और दिशानिर्देश निर्धारित करता है तथा समय-समय पर आयोजित होने वाले बड़े पैमाने के आकलनों, जैसे परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण (पूर्व में राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण), के माध्यम से विद्यालयी शिक्षा प्रणाली की स्थिति की निगरानी करता है।

परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण (पीआरएस) 2024 का आयोजन दिसंबर 2024 में किया गया, ताकि एनईपी 2020 के अंतर्गत छात्रों में दक्षताओं के विकास के संबंध में आधारभूत प्रदर्शन का आकलन किया जा सके। यह आकलन शिक्षा के आधारभूत,  प्रारंभिक और मध्य चरणों के अंत में, अर्थात क्रमशः कक्षा 3, 6 और 9 के विद्यार्थियों के लिए किया गया। यह सर्वेक्षण अधिगम परिणामों और संदर्भगत कारकों पर जिला-स्तरीय साक्ष्य प्रदान करता है, जिससे विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए साक्ष्य-आधारित हस्तक्षेपों का समर्थन किया जा सके।

सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 781 जिलों से 74,000 से अधिक विद्यालयों के 21.15 लाख से अधिक विद्यार्थियों तथा 2.70 लाख शिक्षकों और विद्यालय प्रमुखों ने इस सर्वेक्षण में भाग लिया, जिससे यह देश में छात्र अधिगम का अब तक किया गया सबसे व्यापक आकलनों में से एक बन गया। परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024 के निष्कर्ष दर्शाते हैं कि आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मक कौशल के संदर्भ में एनएएस 2021 के अंकों की तुलना में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अंतर्गत शुरू किए गए निपुण भारत मिशन के सकारात्मक प्रभाव को प्रतिबिंबित करता है।

अधिगम प्रदर्शन को प्रभावित करने वाले संभावित कारकों की पहचान करने तथा अधिगम परिणामों में सुधार के लिए साक्ष्य-आधारित हस्तक्षेपों को सक्षम बनाने के उद्देश्य से, परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण के दौरान शिक्षक प्रशिक्षण, शिक्षण-पद्धतियाँ एवं उपयोग की जाने वाली शिक्षण-अधिगम सामग्री, घरेलू वातावरण और संसाधन, डिजिटल पहुँच एवं उपयोग, विद्यालयीय सहयोग, विद्यालय अवसंरचना एवं समावेशिता, सामुदायिक सहभागिता आदि जैसे संदर्भगत चर से संबंधित आँकड़े भी एकत्र किए गए। परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024 की राष्ट्रीय, राज्य एवं जिला स्तर की रिपोर्टें https://dashboard.parakh.ncert.gov.in/en पर उपलब्ध हैं। यह एक समर्पित डैशबोर्ड है, जिसे इस आकलन के निष्कर्षों के प्रसार के लिए तैयार किया गया है।

जहाँ तक उच्च शिक्षा का संबंध है, राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद (एनएएसी) गुणवत्ता संवर्धन के उद्देश्य से उच्च शिक्षण संस्थानों का मूल्यांकन एवं प्रत्यायन करती है तथा उनकी उपलब्धियों के आधार पर उन्हें ग्रेड प्रदान करती है। इसके अतिरिक्त, भारत सरकार द्वारा वर्ष 2015 में शुरू किया गया राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग ढाँचा (एनआईआरएफ), उच्च शिक्षण संस्थानों की रैंकिंग “शिक्षण, अधिगम और संसाधन”, “अनुसंधान एवं व्यावसायिक प्रथाएँ”, “स्नातक परिणाम”, “पहुँच एवं समावेशिता” तथा “सहकर्मी धारणा” जैसे प्रमुख मानकों के आधार पर करता है। यह रैंकिंग प्रत्येक वर्ष घोषित की जाती है और एनआईआरएफ  की वेबसाइट पर प्रकाशित की जाती है, जो सभी हितधारकों तथा आम जनता के लिए उपलब्ध है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 इसके कार्यान्वयन के लिए विभिन्न समय-सीमाएँ, सिद्धांत और कार्यप्रणाली प्रदान करती है। विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत अनेक हस्तक्षेपों का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना है। केंद्र प्रायोजित समग्र शिक्षा योजना का मुख्य ध्यान शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार पर है। इसके तहत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विभिन्न हस्तक्षेपों के लिए सहायता प्रदान की जाती है, जैसे—सेवारत शिक्षकों और विद्यालय प्रमुखों का प्रशिक्षण, प्रत्येक विद्यालय को अनुकूल शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराने हेतु समग्र विद्यालय अनुदान, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (सीडब्ल्यूएसएन) के लिए सहायता, पुस्तकालय, खेल एवं शारीरिक गतिविधियों के लिए अनुदान, राष्ट्रीय आविष्कार अभियान, टिंकरिंग लैब्स, आईसीटी एवं डिजिटल पहल, विद्यालय नेतृत्व विकास कार्यक्रम, शैक्षणिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए उपचारात्मक शिक्षण, नई शिक्षण एवं पाठ्यचर्या संरचना की शुरुआत, निपुण भारत पहल, ईसीसीई सुविधाओं सहित बाल-अनुकूल एवं समावेशी कक्षाओं का विकास, विद्यालय प्रबंधन समितियों (एसएमसी) को सशक्त बनाना और समुदाय-आधारित पहल, आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों का खोलना, सुदृढ़ीकरण एवं उन्नयन, पात्र बच्चों को निःशुल्क वर्दी तथा प्राथमिक स्तर पर निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें, परिवहन भत्ता प्रदान करना तथा नामांकन एवं निरंतरता (रिटेंशन) अभियान चलाना और परिवहन भत्ता उपलब्ध कराना तथा नामांकन एवं निरंतरता अभियान संचालित करना।

इसके अतिरिक्त, केंद्र प्रायोजित प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण (पीएम पोषण) योजना के अंतर्गत सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में प्राथमिक स्तर (बाल वाटिका सहित) के विद्यार्थियों को उनकी पोषण संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति तथा उपस्थिति में सुधार के लिए प्रतिदिन एक गर्म पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जाता है। वहीं, केंद्र प्रायोजित प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया (पीएम ) योजना के अंतर्गत वर्तमान विद्यालयों को सुदृढ़ किया जा रहा है ताकि वे एनईपी 2020 के सभी पहलुओं का प्रदर्शन कर सकें और आदर्श विद्यालयों के रूप में कार्य करें। इसका उद्देश्य बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक क्षमता (फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी) पर बल देकर, आधारभूत संरचना का उन्नयन करके, पर्यावरण संबंधी संवेदनशीलता विकसित करके तथा रटने की बजाय समग्र, अनुभवात्मक और दक्षता-आधारित शिक्षण के माध्यम से समालोचनात्मक चिंतन और 21वीं सदी के अन्य कौशलों का विकास करते हुए शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाना है।

आज लोकसभा में शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

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