वित्त मंत्री निर्मला सीथारमन ने बजट में 17 कैंसर की दवाओं पर मूल सीमा शुल्क भी घटाया

@ नई दिल्ली :-

कैंसर की जरूरी दवाओं पर जीएसटी हटाने और तंबाकू उत्पादों पर कर बढ़ाने जैसे कदम देश में सार्वजनिक स्वास्थ्य को मजबूत कर रहे हैं। यह बात अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के डॉक्टरों द्वारा किए गए एक नए अध्ययन में सामने आई है। अध्ययन के अनुसार, इन फैसलों से इलाज सस्ता और लोगों की पहुंच में आसान हुआ है, जिससे मरीजों को अपनी जेब से होने वाला खर्च कम पड़ा है।

पिछले साल सितंबर में GST कौंसिल की 56वीं बैठक में 33 जीवनरक्षक दवाओं को पूरी तरह जीएसटी से मुक्त करने की सिफारिश की गई थी। इनमें कैंसर की दवाएं भी शामिल हैं। इन दवाओं पर पहले 12 प्रतिशत टैक्स लगता था, जिसे अब शून्य कर दिया गया है। इसके अलावा, दुर्लभ बीमारियों और कैंसर की तीन अहम दवाओं पर जीएसटी 5 प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया गया। अध्ययन में कहा गया है कि इन कदमों से मरीजों और उनके परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम हुआ है।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीथारमन ने बजट में 17 कैंसर की दवाओं पर मूल सीमा शुल्क भी घटा दिया, जिससे इन दवाओं की कीमतें और कम होंगी।

एम्स के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग के डॉक्टर अभिषेक शंकर ने कहा कि जीएसटी सुधारों से कैंसर इलाज को सस्ता और सुलभ बनाने में बड़ी मदद मिली है। उन्होंने बताया कि दवाओं और चिकित्सा उपकरणों पर टैक्स घटने से मरीजों को सीधा लाभ मिला है।

एक अन्य अहम कदम के तहत जीएसटी परिषद ने तंबाकू उत्पादों पर टैक्स बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया है, जो देश में किसी भी वस्तु पर लगने वाला सबसे ऊंचा टैक्स है। यह बढ़ा हुआ टैक्स 1 फरवरी से लागू हो गया है। तंबाकू पर ज्यादा टैक्स लगाने से लोगों का सेवन कम होता है, इलाज का खर्च बचता है और समय से पहले होने वाली मौतों में भी कमी आती है। इससे स्वास्थ्य पर होने वाला भारी खर्च और गरीबी का खतरा भी घटता है।

तंबाकू को दुनिया भर में कैंसर का सबसे बड़ा रोके जा सकने वाला कारण माना जाता है। वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन और इंटरनेशनल एजेंसी  फॉर  रिसर्च  ऑन  कैंसर  की एक रिपोर्ट के अनुसार, तंबाकू 15 प्रतिशत नए कैंसर मामलों के लिए जिम्मेदार है।

डॉ. शंकर ने कहा कि तंबाकू पर ज्यादा टैक्स लगाने से न सिर्फ सेवन हतोत्साहित होता है, बल्कि इससे मिलने वाली आय को जनस्वास्थ्य पर खर्च किया जा सकता है।

अध्ययन में यह भी कहा गया है कि इस तरह के आर्थिक और नीतिगत बदलाव दूसरे देशों के लिए भी उदाहरण बन सकते हैं, खासकर उन देशों के लिए जहां सामाजिक और स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियां भारत जैसी हैं।

डॉ. शंकर ने कहा कि मरीजों तक इन लाभों का समय पर पहुंचना जरूरी है, लेकिन ये सुधार यह दिखाते हैं कि सरकार इलाज को समर्थन देने, स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने और समान कैंसर देखभाल के लिए संतुलित नीति अपना रही है।

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