AIIMS से IGH : चिकित्‍सक की पर्ची को संभावनाओं में बदलते युवा फार्मासिस्ट

@ नई दिल्ली :-

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के व्यस्त परिसर के भीतर, प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्र (पीएमबीजेपी) में बदलाव की एक शांत लेकिन दृढ़ अंतर्धारा का अनुभव किया जा सकता है। अस्पताल के लंबे गलियारों और चिंतित मनोभावों के बीच युवा फार्मासिस्ट आश्वासन के स्तंभ के रूप में उपस्थित हैं और वे चिकित्‍सक द्वारा निर्धारित औषधि के माध्‍यम से रोगियों को स्‍वास्‍थ्‍य और आर्थिक दोनों तरह का लाभ उपलब्‍ध करा रहे हैं।

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एक युवा वरिष्ठ फार्मासिस्ट के रूप में संगीता अक्टूबर 2024 में केंद्र खुलने के बाद से जनऔषधि मिशन का हिस्सा रही हैं ,वह लोगों की सेवा करने की इच्छा के साथ जनऔषधि केंद्र में शामिल हुईं। हर सुबह, वह नए समर्पण के साथ केंद्र पहुंचती हैं और अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए तैयार रहती हैं।

वह अपनी दिनचर्या से जुड़े एक मार्मिक दृश्‍य को साझा करते हुए बताती हैं: “जब रोगी हाथ में डॉक्टर का पर्चा लेकर केंद्र आते हैं, तो वे अक्सर थके हुए और चिंतित दिखते हैं। जैसे ही वे पर्चा सौंपते हैं, उनकी आंखों में एक मूक डर झलकता है कि दवाओं की कीमत उनकी जेब पर बोझ डाल सकती है, लेकिन जैसे ही उन्‍हें सस्ती कीमतों के बारे में जानकारी मिलती है, ऐसा लगता है कि उनका आधा तनाव दूर हो गया है। उनकी आंखें चमक उठती हैं, और वे मुस्कुराते हुए चले जाते हैं। यहीं मुस्कान हमें आशा प्रदान करती है।

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केंद्र हर दिन लगभग 150-200 ग्राहकों को सेवा प्रदान करता है। सुबह विशेष रूप से भीड़ होती है, लंबी कतारें जल्दी बन जाती हैं।संगीता के साथ-साथ, स्टाफ के सदस्य, अधिकांश युवा, सुचारू सेवा सुनिश्चित करने, पर्चे की जांच करने, दवाइयों का प्रबंधन करने, दवाओं के लिए बिलिंग करने के साथ-साथ धैर्यपूर्वक रोगियों का मार्गदर्शन करने के लिए अथक प्रयास करते हैं। दिनचर्या व्‍यस्‍त है, लेकिन उद्देश्य संकल्‍पपूर्ण है: सभी के लिए सस्ती स्वास्थ्य सेवा।

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इसी तरह की सेवा की भावना युवा फार्मासिस्ट वरुण अग्रवाल में दिखाई देती है, जिन्होंने हाल ही में अपनी फार्मेसी की पढ़ाई पूरी की। अपनेशैक्षणिक वर्षों के दौरान, उन्होंने जनऔषधि पहल के बारे में जानकारी प्राप्‍त की और इस मिशन में योगदान देने का दृढ़ निर्णय लिया। आज, वह गौरवान्वित भाव से केंद्र में सेवा प्रदान कर रहे हैं।वरुण कहते हैं, “पहले के समय की तुलना में, लोग अब दवाओं और जेनेरिक विकल्पों के बारे में अधिक जागरूक हैं। उन्होंने कहा, विशेष रूप से ‘वरिष्ठ नागरिक, हमें आशा की दृष्टि से देखते हैं। हम उनकी सहायता करने और सब कुछ स्पष्ट रूप से समझाने की पूरी कोशिश करते हैं। उनका विश्वास हमें हर दिन प्रेरणा देता है।

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इंदिरा गांधी अस्पताल के जनऔषधि केंद्र के फार्मासिस्ट और प्रबंधक पीयूष इस मिशन का हिस्सा बनना अपना सौभाग्य मानते हैं। हर दिन, केंद्र लगभग 150-200 ग्राहकों को सेवा प्रदान करता है, जो किफायती स्वास्थ्य सेवा में लोगों के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। उनका कहना है, “जनऔषधि का हिस्सा बनना केवल दवाओं के वितरण से ही संबंधित नहीं है क्‍योंकि यहां आने वाले हर व्यक्ति को एक चिंता होती है किंतु बाहर निकलने वाले हर व्यक्ति को राहत महसूस होती है। मनोभावों का यह बदलाव ही इस कार्य को वास्तव में सार्थक बनाता है।

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इंदिरा गांधी अस्पताल (आईजीएच)के जनऔषधि केंद्र में, एक अन्य युवा फार्मासिस्ट हिमांशु कुमार प्रतिबद्धता की एक समान कहानी साझा करते हैं। हर दिन, वह पूर्ण प्रेरणा के साथ केंद्र में लोगों की सहायता और उनकी सेवा करने के लिए आते हैं। उनके साथ, चार अन्य युवा टीम के सदस्य संचालन का प्रबंधन करते हैं: दो बिलिंग संभालते हैं और दो वितरण की देखरेख करते हैं।

दिल्ली में लगभग 600 जनऔषधि केंद्रों में लगभग 70 प्रतिशत कर्मचारी युवा हैं और यह इन सेवाओं को प्रदान करने में युवाओं की मजबूत भूमिका को दर्शाता है। ये ऐसे स्थल हैं जहां चिंता आश्वासन में बदल जाती है, जहां सामर्थ्य गरिमा को पुनर्स्थापित करता है और जहां युवा पेशेवर अपने करियर को सार्थक सेवा में परिवर्तित कर रहे हैं। रोगी की आंखों में झलकने वाली यह चमक और एक युवा फार्मासिस्ट की आत्मविश्वास से परिपूर्ण प्रगति में, जनऔषधि केंद्र की सच्ची भावना जीवंत हो उठती है। बेहतर स्वास्थ्य और आशा के समन्‍वय से होने वाली देखभाल इन केन्‍द्रों में स्‍पष्‍ट रूप से झलकती है।

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