@ कमल उनियाल उत्तराखंड :-
लोकपर्व हरेला प्रकृति से जुड़ा पर्व है धरती में हरियाली हो हमारे आस पास की धरा हरी भरी दिखे इसलिए हरियाली के प्रतीक हरेला पर्व मनाया जाता है। उत्तराखंड में पर्यावरण संरक्षण पर पर्यावरण बचाने के तहत विभिन्न प्रजाति के पौधे रोपित किये गये। वृक्षारोपण कर प्रकृति प्रेम का संदेश दिया गया।

इसी के तहत भूमी संरक्षण वन प्रभाग लैन्सडौन, द हंस फांउडेशन और स्थानीय ग्रामीणो ने संयुक्त रुप से वृक्षारोपण कर पर्यावरण बचाने का संकल्प लिया। हरेला पर्व के अवसर पर प्रभागीय वन अधिकारी भूमी संरक्षण वन प्रभाग लैन्सडौन स्पर्श काला और वन क्षेत्र अधिकारी विशन दत्त जोशी ने ग्राम सीला, मूरान्यु में पोलम प्रजाति का पौधारोपण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर प्रभागीय वनाअधिकारी ने कहा दिनो दिन हमारा पर्यावरण प्रदुषित हो रहा है, जिससे मानव जीवन पर प्रतिकूल असर पड रहा है इसलिए हम सब को मिलकर अधिक से अधिक संख्या में वृक्षारोपण कर वसुधा को हरा भरा बनाने का संकल्प लेना होगा।
उन्होने कहा जो गाँव इस पुण्य कार्य में अग्रणी रहेगा उसे विभाग पूर्ण सहयोग करेगा। वनक्षेत्र अधिकारी विशन दत्त जोशी ने कहा इस समय प्रकृति वैश्वीक संकट से जूझ रही है इसलिए इस पर्व पर प्रकृति की अराधना के साथ वृक्षारोपण करना होगा।
उधर भूमी संरक्षण वन प्रभाग लैन्सडौन के मटियाली रेंज में उपप्रभागीय वनाअधिकारी प्रशान्त हिन्दवाण, द हंस फाउडेशन के सीडीएस सतीश चंद्र बहुगुणा, कृषि विभाग के बीटीएम संजय कुकरेती ने वृक्षारोपण कर प्रकृति प्रेम का संदेश दिया जिसके अन्तर्गत आंवला, जामुन, नाशपती, आडू, आम आदि प्रजाति के पौधारोपण कर पौधो को बचाने का संकल्प लिया।

अपने संबोधन में उपप्रभागीय वनाअधिकारी प्रशान्त हिन्दवाण, द हंस फाउडेशन के सीडीएस सतीश चंद्र बहुगुणा ने कहा वृक्ष हमे शुद्ध जीवनदायनी हवा प्रदान करते है इसलिए इस पर्व पर प्रत्येक परिवार एक पेड लगाने का संकल्प ले और उसके संरक्षण की जिम्मेदारी आजीवन ले। कृषि विभाग के बीटीएम संजय कुकरेती ने कहा इस पावन पर्व पर एक पेड माँ के नाम पर एक पेड बच्चे के नाम पर लगाकर धरती का हरित श्रृंगार करे बिना पेड़ों की जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती हरेला पर्व मानव को प्रकृति से जोडता है। कार्यक्रम का संचालन कमलेश रतूडी वन दरोगा मटियाली ने किया।
