@ नई दिल्ली :-
राजधानी में बढ़ते प्रदूषण और ट्रैफिक कंट्रोल को लेकर कमर्शियल वाहनों की एंट्री पर सख़्त नियम लागू हैं—सुबह-शाम तय समय पर ही ऐसे वाहनों को आने की अनुमति दी जाती है। लेकिन इन नियमों की आड़ में एक बड़ा फर्जीवाड़ा किएटली फल-फूल रहा था। अब पुलिस ने इस पूरे गोरखधंधे का पर्दाफाश कर दिया है।

एआरएससी की टीम ने दबोचा ‘एंट्री रैकेट’, 6 लाख से अधिक की कमाई का खुलासा ट्रैफिक पुलिस के एडवांस्ड रोड सेफ्टी सेल (ARSC) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नकली एंट्री स्टिकर बेचने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पकड़े गए आरोपियों में जश्ना उर्फ़ राजा, कपिल कुमार चौधरी, दिनेश चौधरी उर्फ़ राजकुमार समेत कई लोग शामिल हैं।
इनके पास से हजारों स्टिकर, फर्जी मुहरें और सरकारी दस्तावेज मिलने के बाद पुलिस भी हैरान रह गई।
सूत्रों के मुताबिक बदरपुर ट्रैफिक सर्कल में तैनात एसएसआई संजय सिंह की शिकायत पर दर्ज मामले में 29 अप्रैल को पहली गिरफ्तारी हुई। जांच में सामने आया कि आरोपी कमर्शियल गाड़ियों के मालिकों व ड्राइवरों को अवैध ‘एंट्री परमिशन’ के नाम पर मोटी रकम लेकर स्टिकर बांट रहे थे।
ऑनलाइन भी चल रहा था फर्जीवाड़ा , पुलिस ने बताया कि एक व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए ये लोग ग्राहकों से संपर्क करते थे। वाहन मालिक बस गाड़ी का नंबर भेजते, और बदले में उन्हें मिल जाता “फर्जी एंट्री परमिशन स्टिकर।
पूरे नेटवर्क का संचालन एक ऑनलाइन क्राइम सिंडिकेट की तरह किया जा रहा था।पिस्टल से लेकर स्पाई-कैम तक—सारा सामान जब्त
छापेमारी में पुलिस ने हैरान कर देने वाला सामान बरामद किया—
• करीब 1300 नकली स्टिकर ।
• मुहरें और स्टैंप ।
• फर्जी लाइसेंस बनाने की मशीन ।
• एक पिस्टल, एक स्पाई कैमरा ।
• कई मोबाइल फोन, कंप्यूटर और रिकॉर्ड ।
• वाहन चालकों के डॉक्यूमेंट और रजिस्टर ।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी जश्ना खुद को फर्जी कुछ अधिकारियों का ‘क्लोज कॉन्टैक्ट’ बताकर लोगों को फंसाता था। इसके साथ ही सरकारी विभागों का डेटा भी इनके पास मिला है।
व्यापारियों से लेकर ड्राइवरों तक—सबको लगाया चूना,गिरोह न केवल कमर्शियल वाहनों को एंट्री स्टिकर दे रहा था, बल्कि कई मामलों में सरकारी कर्मियों के नाम भी इस्तेमाल किए गए। ड्राइवरों और ट्रांसपोर्टर्स को लगता था कि वे असली पास ले रहे हैं।
दिल्ली पुलिस की कड़ी कार्रवाई जारी,पुलिस का कहना है कि गिरोह के तार और भी जगहों से जुड़े हो सकते हैं। टीम अब नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की तलाश कर रही है। राजधानी में कानून तोड़ने वाले इस ‘फर्जी एंट्री सिंडिकेट’ पर कार्रवाई से राहत तो मिली है, लेकिन यह भी साफ हो गया है कि ऐसे नेटवर्क शहर की सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती हैं।
