दिमागी नक्सलियों की पहचान करना बड़ी चुनौती: प्रधानमंत्री

@ बस्तर छत्‍तीसगढ़ :-

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के बस्तर में सुरक्षा बलों के जवानों से संवाद करते हुए नक्सलवाद के खिलाफ देश की लंबी लड़ाई, जवानों के बलिदान और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हुए विकास कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जंगलों से हथियारबंद नक्सलियों का सफाया हो चुका है, लेकिन अब देश के सामने एक नई चुनौती है। कुछ लोग वैचारिक स्तर पर नक्सलवाद को बढ़ावा देकर राजनीतिक दलों और विभिन्न संगठनों में घुसपैठ कर रहे हैं। ऐसे लोगों की पहचान करना और संविधान तथा लोकतंत्र के खिलाफ फैलाए जा रहे विचारों का मुकाबला करना जरूरी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि एक समय देश के करीब 20 राज्यों के 230 से अधिक जिले नक्सलवाद से प्रभावित थे। बिहार, महाराष्ट्र, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में नक्सली हिंसा के कारण करोड़ों लोगों का जीवन प्रभावित था। कई क्षेत्रों में शाम होते ही जनजीवन ठप हो जाता था और लोग भय के माहौल में जीने को मजबूर थे।

वर्ष 2010 में दंतेवाड़ा में हुई नक्सली हिंसा का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि उस वर्ष मुठभेड़ में सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद हुए थे, जबकि एक अन्य घटना में 44 निर्दोष नागरिकों की हत्या कर दी गई थी। प्रधानमंत्री के अनुसार, अकेले छत्तीसगढ़ में एक हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों ने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के बाद सरकार ने मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और सुनियोजित रणनीति के साथ नक्सलवाद के खिलाफ अभियान चलाया। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने पिछले एक वर्ष में ड्यूटी के दौरान सीआरपीएफ के किसी जवान के शहीद नहीं होने को सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी उपलब्धि बताया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने सुरक्षा अभियान के साथ विकास को भी प्राथमिकता दी। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 1,500 किलोमीटर से अधिक सड़कें, 9,500 से ज्यादा मोबाइल टावर, करीब 200 एकलव्य विद्यालय, 50 आईटीआई और 50 कौशल विकास केंद्र स्थापित किए गए। इसके अलावा बैंक, डाकघर और एटीएम जैसी सुविधाओं का विस्तार किया गया।

उन्होंने विश्व बैंक की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत के 50 करोड़ लोग भीषण गरीबी से बाहर निकले हैं। मोदी ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई के साथ विकास, शिक्षा, रोजगार और पुनर्वास के प्रयासों ने प्रभावित क्षेत्रों में नई उम्मीद जगाई है।

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