इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में लांस डेन संग्रह की दुर्लभ गणेश मूर्तियों की पेंटिंग्स की प्रदर्शनी

@ नई दिल्ली :-

गणेश चतुर्थी के अवसर पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के तहत लांस डेन के संग्रह से 12वीं से 20वीं शताब्दी तक की गणेश मूर्तियों की प्रदर्शनी आम जनता के लिए खोली गई। साथ ही प्रसिद्ध कलाकार के. विश्वनाथन की पेंटिंग्स भी दर्शकों के लिए प्रदर्शित की गईं।

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इस अवसर पर आईजीएनसीए के अध्यक्ष राम बहादुर राय, सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी, संरक्षण एवं सांस्कृतिक अभिलेखागार प्रभाग के प्रमुख प्रो. अचल पंड्या और कला दर्शन प्रभाग की प्रमुख प्रो. ऋचा कांबोज भी उपस्थित रहे। ये प्रदर्शनियाँ आईजीएनसीए के संरक्षण और कला दर्शन प्रभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित की गई है और 5 सितंबर तक दर्शनम गैलरी में दर्शकों के लिए खुली रहेगी।

आपको बता दें कि कि लांस डेन एक ब्रिटिश कला इतिहासकार और संग्रहकर्ता थे जिन्होंने अपना जीवन कला के शाश्वत मूल्यों को समर्पित कर दिया। प्रदर्शनी में गणेश के विभिन्न रूपों को प्रस्तुत किया गया है, जिसमें उन्हें शिव-पार्वती के पुत्र और कार्तिकेय के भाई के रूप में दर्शाया गया है। इसी कारण आईजीएनसीए के संरक्षण प्रभाग ने इस प्रदर्शनी का शीर्षक  ‘विघ्नेश्वर कुटुम्ब: गणेश और उनका परिवार’ रखा है।

प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए आईजीएनसीए के अध्यक्ष और पद्म भूषण से सम्मानित राम बहादुर राय ने कहा कि ऐसे आयोजनों का वास्तविक उद्देश्य इन्हें अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाना है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं को इस सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। अपने संबोधन में राय ने कहा कि “गणेश हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। वह ज्ञान और संस्कृति के पथप्रदर्शक हैं।

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संरक्षण और सांस्कृतिक अभिलेखागार प्रभाग के प्रमुख प्रो. अचल पंड्या ने कहा कि हाल के वर्षों में आईजीएनसीए ने अपने संग्रह को जनता तक पहुँचाने के प्रयास किए हैं। इसी क्रम में लांस डेन संग्रह से मूर्तियों को प्रस्तुत किया गया है। इन्हें प्राप्त करना हमारे लिए संतोष का विषय है। हम अन्य संग्रहों से भी कला कृतियों को जनता तक ला रहे हैं ताकि लोग देश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ सकें। इस अवसर पर कला प्रेमियों, विद्वानों और विविध दर्शकों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भी समृद्ध बनाया।

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