कोयला मंत्रालय सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम पोर्टल पर अन्वेषण मॉड्यूल लॉन्च करेगा

@ नई दिल्ली :-

अपनी डिजिटल प्रगति को जारी रखते हुए कोयला मंत्रालय अब सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिज़ाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड के जरिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम वेब पोर्टल पर अन्वेषण मॉड्यूल लॉन्च करने के लिए तैयार है और इसका उद्घाटन 4 जुलाई 2025 को केंद्रीय कोयला मंत्री द्वारा किया जाएगा। यह मॉड्यूल कोयला अन्वेषण मूल्य श्रृंखला के एंड-टू-एंड डिजिटलीकरण में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि को दर्शाता है। अन्वेषण मॉड्यूल आवंटियों को अपने अन्वेषण प्रस्तावों को ऑनलाइन जमा करने की अनुमति देगा, जिसे बाद में एकीकृत प्रणाली के माध्यम से मंत्रालय द्वारा संसाधित और अनुमोदित किया जाएगा।

यह मॉड्यूल कोयले के अन्वेषण की पूरी प्रक्रिया को कवर करता है, जिसमें भूवैज्ञानिक रिपोर्ट का अनुमोदन – अन्वेषण योजना की जांच, आवधिक प्रगति अपडेट का जमा करना, भूवैज्ञानिक रिपोर्टों का जमा करना और अनुमोदन शामिल है, जिसमें टिप्पणियों, अनुपालन अपलोड और अंतिम अनुमोदन का सभी संचार – सभी एक ही डिजिटल इंटरफ़ेस के भीतर हैं। यह प्रत्येक चरण के लिए संरचित समयसीमा बनाए रखते हुए अन्वेषण डेटा और अनुमोदन को संसाधित करने में पारदर्शिता सुनिश्चित करता है। वास्तविक समय की ट्रैकिंग, स्वचालित डिजिटल दस्तावेज़ प्रबंधन और एकीकृत डैशबोर्ड के साथ यह मॉड्यूल अन्वेषण प्रस्तावों को संसाधित करने के लिए आवश्यक समय को काफी तेजी से कम करने के लिए तैयार है।

CMPDIL के सहयोग से विकसित यह मॉड्यूल ई-गवर्नेंस और तकनीकी सत्यापन में सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाता है। यह कोयला संसाधन मूल्यांकन की गतिशील निगरानी को सक्षम करेगा और मंत्रालय के कोयला ब्लॉक आवंटन और इसके संचालन के साथ संरेखण में सुधार करेगा। इस प्रकार अन्वेषण मॉड्यूल का शुभारंभ भारत के कोयला क्षेत्र में उत्पादकता, डेटा पारदर्शिता और अनुमोदन की गति को बढ़ाने में एक परिवर्तनकारी कदम होगा, जो देश की ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास लक्ष्यों में और योगदान देगा।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत और डिजिटल रूप से सशक्त इको-सिस्टम के विजन के अनुरूप कोयला मंत्रालय ने सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम (SWCS) की क्षमताओं का विस्तार करके अपनी डिजिटल परिवर्तन यात्रा जारी रखी है। 11 जनवरी 2021 को लॉन्च किया गया SWCS एक अग्रणी पहल है, जिसका उद्देश्य देश भर में कोयला खदानों के संचालन और कोयला उत्पादन को बढ़ाने के लिए आवश्यक सभी अपेक्षित मंजूरी और अनुमोदन प्राप्त करने के लिए एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म प्रदान करना है। इस एकल डिजिटल गेटवे के माध्यम से कोयला खनन हितधारक खनन योजना और खान समापन योजना अनुमोदन, खनन पट्टा अनुदान, पर्यावरण और वन मंजूरी, स्थापना और संचालन के लिए सहमति, वन्यजीव मंजूरी, भूमि अधिग्रहण और केंद्रीय भूजल मंजूरी सहित वैधानिक अनुमतियों तक निर्बाध रूप से पहुंच सकते हैं।

विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और राज्य सरकार के विभागों/एजेंसियों द्वारा दी गई इन मंजूरियों को मैप किया जाता है और SWCS पोर्टल में एकीकृत किया जाता है, जिससे विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित होता है। पोर्टल को कई अनुमोदनों को प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल बनाने, पारदर्शिता बढ़ाने, नौकरशाही में देरी को कम करने और निर्णय लेने में तेज़ी लाने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिससे कोयला क्षेत्र में व्यापार करने में और आसानी तथा उल्लेखनीय सुधार होता है।

वर्तमान में SWCS पोर्टल को कई मुख्य मॉड्यूलों के साथ विकसित किया गया है, जिसमें खनन योजना अनुमोदन, खदान खोलने की अनुमति और राष्ट्रीय एकल खिड़की प्रणाली (एनएसडब्ल्यूएस) जैसे राष्ट्रीय प्लेटफार्मों के साथ एकीकरण, एंड-टू-एंड डिजिटल प्रोसेसिंग का समर्थन और पर्यावरण मंजूरी (ईसी), वन मंजूरी (एफसी), वन्य जीवन मंजूरी प्राप्त करने के लिए लागू किए जा रहे परिवेश 2.0 के साथ एकीकरण शामिल है।

पंजीकरण मॉड्यूल SWCS वेब पोर्टल का एक हिस्सा है जो उपयोगकर्ताओं को SWCS सेवाओं तक पहुंचने के लिए अधिकृत खाते बनाने की अनुमति देता है। आवेदकों को व्यक्तिगत विवरण, कंपनी क्रेडेंशियल और कोयला ब्लॉक की जानकारी के साथ-साथ सीएमडी/सीईओ से प्राधिकरण पत्र प्रस्तुत करना होगा। सत्यापन के बाद उपयोगकर्ता आवेदन जमा करने, अपनी प्रगति को ट्रैक करने और प्रासंगिक दस्तावेज़ डाउनलोड करने के लिए लॉग इन कर सकते हैं।

खनन योजना मॉड्यूल, जो 2021 में लाइव हुआ, खनन योजनाओं और खान समापन योजनाओं को ऑनलाइन जमा करने और अनुमोदन करने की सुविधा प्रदान करता है। जांच आपत्तियों से लेकर अनुपालन प्रस्तुत करने तक का पूरा संचार प्रत्येक के लिए 15 दिनों की निर्धारित समयसीमा के भीतर डिजिटल रूप से संचालित किया जाता है। इसकी स्थापना के बाद से, SWCS पोर्टल पर 126 खनन योजना प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 108 संसाधित किए गए हैं और शेष समीक्षाधीन हैं। औसत प्रोसेसिंग टाइम ऑफ़लाइन व्यवस्था में 9-12 महीनों की तुलना में 4.5 महीने हो गया है।

कोयला खनन कार्य शुरू करने के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि, माइन ओपनिंग परमिशन (एमओपी) मॉड्यूल, 7 नवंबर 2024 को कोयला मंत्रालय के सचिव द्वारा लॉन्च किया गया था। एमओपी मॉड्यूल पारंपरिक ऑफ़लाइन प्रक्रिया की जगह लेता है, जिससे डिजिटल सबमिशन, रियल-टाइम ट्रैकिंग और त्वरित अनुमोदन सक्षम होते हैं और इससे एक अधिक पारदर्शी और कुशल प्रणाली को बढ़ावा मिलता है। आज की तारीख तक, पोर्टल के माध्यम से 27 खदान खोलने की अनुमति के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 19 को मंजूरी दे दी गई है, शेष 8 प्रस्ताव अभी प्रक्रियाधीन हैं।

प्रोजेक्ट सूचना प्रबंधन प्रणाली (पीआरआईएमएस) मॉड्यूल परियोजना प्रस्तावकों को सीएमपीडीए और वेस्टिंग ऑर्डर के अनुसार परियोजना-विशिष्ट डेटा जमा करने में सक्षम बनाता है। यह मंजूरी, उत्पादन रिपोर्टिंग, भुगतान और प्रदर्शन गारंटी की निर्बाध ट्रैकिंग की अनुमति देता है। एक समर्पित उप-मॉड्यूल – ‘नामित प्राधिकारी के साथ अनुरोध’ – आवंटियों द्वारा किए गए प्रश्नों और प्रस्तुतियों का समय पर निवारण सुनिश्चित करता है।

परिवेश 2.0 पोर्टल के साथ एकीकरण पूरा हो चुका है और कार्यान्वयन के अधीन है, जो पर्यावरण मंजूरी, वन मंजूरी और वन्यजीव मंजूरी के तेजी से प्रोसेसिंग के लिए SWCS तथा पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के बीच सहज डेटा विनिमय को सक्षम बनाता है। यह अपग्रेड एक बेहतर उपयोगकर्ता अनुभव, प्रमुख डेटा प्रवाह का स्वचालन और बेहतर परिचालन दक्षता प्रदान करता है।

डिजिटल इंडिया पहल के तहत SWCS को राष्ट्रीय एकल खिड़की प्रणाली के साथ एकीकृत किया गया है। यह एकीकरण परियोजना प्रस्तावकों को एनएसडब्ल्यूएस पर अपना पंजीकरण शुरू करने और सीधे SWCS सेवाओं तक पहुंचने में सक्षम बनाता है, जिससे मंत्रालयों और विभागों में आवेदन और मंजूरी प्रक्रिया सरल हो जाती है।

इस महत्वपूर्ण डिजिटल परिवर्तन के आलोक में सभी हितधारकों को इन ऑनलाइन मॉड्यूल का पूरी क्षमता से सक्रिय रूप से उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। सभी संबंधित एजेंसियों और आवंटियों से समन्वय और समय पर कार्रवाई निर्बाध कार्यान्वयन और प्रभावी परिणामों को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण होगी। कोयला ब्लॉक आवंटियों से रचनात्मक प्रतिक्रिया और सुझाव आमंत्रित किये जाते हैं, ताकि प्रणाली को और बेहतर बनाया जा सके तथा पारदर्शी और प्रौद्योगिकी-संचालित शासन के प्रति मंत्रालय की प्रतिबद्धता को मजबूत किया जा सके।

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