राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म ‘चलो जीते हैं’ देशव्यापी विशेष पुनः-प्रदर्शन के लिए तैयार

@ नई दिल्ली :-

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म चलो जीते हैं—स्वामी विवेकानंद के दर्शन बस वही जीते हैं, जो दूसरों के लिए जीते हैं को एक मार्मिक सिनेमाई श्रद्धांजलि—17 सितंबर से 2 अक्टूबर, 2025 तक पूरे भारत में विशेष रूप से पुनः प्रदर्शन के लिए तैयार है। समीक्षकों द्वारा प्रशंसित यह फिल्म, जो वर्ष 2018 की सबसे अधिक देखी जाने वाली लघु फिल्मों में से एक है। यह फिल्म लाखों स्कूलों और देश भर के लगभग 500 सिनेमाघरों में दिखाई जाएगी, जिनमें पीवीआरआइनॉक्स, सिनेपोलिस, राजहंस और मिराज शामिल हैं।

युवा मन को प्रेरित करना

इस पुनः प्रदर्शन के उपलक्ष्य में, ‘चलो जीते हैं: सेवा का सम्मान’ पहल शुरू की गई है। इस पहल के अनतर्गत, स्कूलों और समाज के ‘मूक नायकों’—चौकीदार, सफाई कर्मचारी, ड्राइवर, चपरासी और अन्य लोग जो दैनिक जीवन के सुचारू संचालन में शांतिपूर्वक योगदान देते हैं—को सम्मानित और पुरस्कृत किया जाएगा। ये समारोह विद्यार्थियों द्वारा ‘मूक नायकों’ के साथ फिल्म देखने के बाद आयोजित किए जाएंगे, जो युवा प्रतिभाओं को न केवल अपने लिए बल्कि दूसरों की सेवा के लिए जीने के लिए प्रेरित करेंगे।

स्वामी विवेकानंद के दर्शन को श्रद्धांजलि

यह फिल्म प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जीवन की एक बाल्यकालीन घटना से प्रेरित है। यह युवा नारू की कहानी है, जो स्वामी विवेकानंद के दर्शन से गहराई से प्रभावित होकर, उसका अर्थ समझने का प्रयास करता है और अपनी छोटी सी दुनिया में बदलाव लाने का प्रयास करता है। इस पहल के माध्यम से, निस्वार्थता और सेवा का शाश्वत संदेश नई पीढ़ी तक प्रभावशाली माध्यम से पहुँचेगा।

राष्ट्रव्यापी प्रभाव

निर्माता महावीर जैन ने कहा यह आंदोलन एक गहरा और शक्तिशाली संदेश देता है। यह लाखों युवाओं को प्रत्येक कार्य और हर व्यक्ति का सम्मान करने तथा उसका मूल्यांकन करने के लिए प्रेरित करेगा। यह निस्वार्थता, सहानुभूति और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य के शाश्वत मूल्यों को मज़बूत करता है—यह हमारे प्रधानमंत्री के प्रति एक सच्ची श्रद्धांजलि है। उन्होंने कहाइस फिल्म के माध्यम से, हम युवाओं के दिलों में एक चिंगारी जलाने और उन्हें उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने तथा समाज में सकारात्मक योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करने की आशा करते हैं।

पारिवारिक मूल्यों पर आधारित सर्वश्रेष्ठ गैर-फीचर फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार विजेताचलो जीते हैं दर्शकों के दिलों में आज भी अपनी जगह बनाए हुए है। मंगेश हदावले द्वारा निर्देशित और आनंद एल. राय तथा महावीर जैन द्वारा प्रस्तुत, दूसरों के लिए जीने का यह फिल्म का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना कि पहली बार प्रदर्शित होने पर था। अब इसका विशेष पुनः-प्रदर्शंब प्रधानमंत्री के प्रेरक जीवन और दर्शन को श्रद्धांजलि के रूप में उस संदेश को और आगे ले जाने का प्रयास है।

स्कूलों में फिल्म का प्रदर्शन इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो यह सुनिश्चित करता है कि फिल्म का संदेश विद्यार्थियों के दिलों में गूंजे और उन्हें उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने के लिए प्रोत्साहित करे।

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