@ नई दिल्ली
वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद ने अपनी अभूतपूर्व अनुदैर्ध्य स्वास्थ्य निगरानी परियोजना ‘फेनोम इंडिया-CSIR हेल्थ कोहोर्ट नॉलेजबेस’ के पहले चरण के सफल समापन की घोषणा की।

इस महत्वपूर्ण उपलब्धि को यादगार बनाने के लिए CSIR ने 3 जून को गोवा के राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान में एक विशेष कार्यक्रम ‘फेनोम इंडिया अनबॉक्सिंग 1.0’ का आयोजन किया। CSIR-इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी के निदेशक डॉ. सौविक मैती CSIR-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशनोग्राफी के निदेशक डॉ. सुनील कुमार सिंह CSIR-आईजीआईबी के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. शांतनु सेनगुप्ता CSIR के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र प्रसाद सिंह और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर इंटेलिजेंट सेंसर्स एंड सिस्टम्स के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. वीरेन सरदाना उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में शामिल थे।
मीडिया को संबोधित करते हुए CSIR-इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. शांतनु सेनगुप्ता ने कहा कि यह भारतीय स्वास्थ्य सेवा के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है। उन्होंने बताया कि भारत में कार्डियो-मेटाबोलिक बीमारियों का के बहुत केस होने के बावजूद भारतीय आबादी में इतनी अधिक घटनाओं के कारण पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हैं। उन्होंने कहा पश्चिम के जोखिम कारक भारत के जोखिम कारकों के समान नहीं हैं। एक कारक जो किसी विशेष व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है वह दूसरे व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण नहीं हो सकता है। इसलिए हमारे देश में एक ही तरह की अवधारणा को खत्म करना होगा।
उन्होंने बताया कि पहली बार कार्डियो-मेटाबोलिक बीमारी विशेष रूप से मधुमेह लिवर रोग और हृदय रोगों के लिए एक उन्नत पूर्वानुमान मॉडल विकसित करने के उद्देश्य से एक अखिल भारतीय अनुदैर्ध्य अध्ययन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह का अध्ययन महत्वपूर्ण है क्योंकि इन बीमारियों में आनुवंशिक और जीवनशैली दोनों कारक होते हैं जो जोखिम में योगदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि अध्ययन 10000 नमूनों के अपने लक्ष्य को पार करने में सफल रहा है। उन्होंने अन्य संगठनों से भी इसी तरह के नमूना संग्रह अभियान शुरू करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा मान लीजिए हमें लगभग 1 लाख या 10 लाख नमूने मिल जाते हैं तो इससे हम देश में सभी प्रमुख मापदंडों को फिर से परिभाषित करने में सक्षम हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि CSIR ने नमूना संग्रह के लिए एक लागत प्रभावी मानक संचालन प्रक्रिया विकसित की है।
भारतीय आबादी में कार्डियो मेटाबोलिक विकारों के बढ़ते जोखिम और घटनाओं के पीछे छिपे तंत्रों को समझना और इन प्रमुख बीमारियों के जोखिम स्तरीकरण रोकथाम और प्रबंधन के लिए नई रणनीतियां विकसित करना महत्वपूर्ण है। वर्तमान में इनमें से अधिकांश जोखिम पूर्वानुमान एल्गोरिदम काकेशियन आबादी के महामारी विज्ञान डेटा पर आधारित हैं और इस बात के प्रमाण हैं कि वे जातीय विविधता विभिन्न आनुवंशिक संरचना और आहार संबंधी आदतों सहित जीवनशैली पैटर्न के कारण भारतीय आबादी के लिए बहुत सटीक नहीं हो सकते हैं। इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि भारत-विशिष्ट जोखिम पूर्वानुमान एल्गोरिदम विकसित किए जाएं।
फेनोम इंडिया परियोजना पूर्वानुमानित व्यक्तिगत सहभागी और निवारक स्वास्थ्य सेवा के माध्यम से सटीक चिकित्सा को आगे बढ़ाने के लिए CSIR की प्रतिबद्धता का उदाहरण है। भारतीय आबादी के अनुरूप एक व्यापक फेनोम डेटाबेस तैयार करके परियोजना का उद्देश्य पूरे देश में इसी तरह की पहल को उत्प्रेरित करना है जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि जोखिम पूर्वानुमान एल्गोरिदम अधिक सटीक हों और भारत के विविध आनुवंशिक और जीवन शैली परिदृश्य का प्रतिनिधित्व करें।
