उत्तराखंड में पिरुल बना आर्थिकी का जरीया, स्वरोजगार से जुड रहीं हैं महिलाये

@ कमल उनियाल उत्तराखंड :-

उत्तराखंड में 3.4 हेक्टेयर में हर साल 2.04 मिलियन टन चीड के पत्तो पिरुल का उत्पादन होता है। गर्मी शुरु होते ही ही चीड की पत्ती पिरूल को वनाग्नी के लिए अभिशाप माना जाता है पर अब यह पिरुल अभिशाप नहीं स्वरोजगार का जरीया बन रहा है।

अनेक स्वयं सहयता समूह से जुड़ी महिलायें पिरुल संग्रहण से आय अर्जित कर रही है। पिरूल इकठ्ठा करके महिलाये किलोग्राम के हिसाब से भुकतान प्राप्त कर रही है। और इस के संग्रहण से वनो में आग लगने का भी खतरा कम हो रहा है।

विकास खंड द्वारीखाल में अनेक गाँवो की महिलाये पिरूल संग्रहण करके स्वरोजगार से जुड रही है जिससे उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ हो रही है। पौड़ी जनपद के धुमाकोट नैनीडांडा में पिरुल संग्रहण केन्द्र बनाया गया है जहाँ विभिन्न गाँवो से एकत्र पिरूल पहुँचाया जाता है।

पिरूल से कोयला उत्पाद हो रहा है जिससे अनेक स्थानीय युवाओ को रोजगार मिल रहा है। चीड की हरी पत्ती से टोकरी, गुलदस्ता, बैग राखी, झाडू बनाकर महिलाये स्वरोजगार के क्षेत्र में नया आयाम गढ रही है। पिरुल से बने ये आकर्षक उत्पाद सभी के मन को भा रहे है साथ में आय का स्रोत भी बढा रहा है और स्वयं सहयता से जुड़ी महिलायें इस योजना से जुडकर आर्थिकी के क्षेत्र में मजबूती से कदम बढा रही है।

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