@ जयपुर राजस्थान :-
हम सबको कम से कम अपने-अपने घरों में तो राजस्थानी भाषा ही बोलनी चाहिए। इससे न केवल अपनी भाषा को बढ़ावा मिलेगा,तथा अपनापन भी बढ़ेगा, क्योंकि राजस्थानी भाषा में अपनायत है,जो सबको आपस में जोड़ने का काम करती है। यह कहना था राजस्थान की लता व मरू कोकिला के रूप में पहचान रखने वाली राजस्थान की सिरमौर लोकगायिका सीमा मिश्रा का। वे झालाना स्थित राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (आरआईसी) में स्वर्णिम सम्मान समारोह में बोल रही थीं।

सीमा मिश्रा राजस्थान लोकसंगीत-कला अकादमी व स्वर माधुरी मल्टीमीडिया की ओर से आयोजित समारोह में राष्ट्रगान के साथ झुंझुनूं जिले के छापोली (उदयपुरवाटी) में सड़क निर्माण कार्य के दौरान करंट से हृदयविदारक हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों के प्रति 2 मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई व शोकाकुल परिजनों के संवेदनाएं व्यक्त कीं।
समारोह में लोकसंगीत, संस्कृति और सम्मान का अनूठा संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में प्रदेशभर से कला, संस्कृति, राजनीति, प्रशासन और सामाजिक क्षेत्र की हस्तियों ने शिरकत की।
समारोह के दौरान सीमा मिश्रा की तीन दशक लंबी स्वर-साधना और राजस्थानी लोकगीत-संगीत, भाषा व संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार में दिए गए योगदान को सराहा गया तथा लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड विरासत-ए-राजस्थान से मिश्रा को सम्मानित किया गया।
समारोह में सांसद मंजू शर्मा, विधायक रवीन्द्र सिंह भाटी, जयपुर महापौर सुनील कोठारी, उप महापौर सरोज कंवर,वरिष्ठ शिक्षाविद राजवीर सिंघ चलकोई, भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष राखी राठौड़, पूर्व मंत्री राजेंद्र राठौड़, विधायक हाकम अली खान, विधायक बालमुकुंदाचार्य, पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र निदेशक अश्विन दल्वी, जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी संस्थापक ओपी अग्रवाल और उद्योगपति कमल पोद्दार, शिव सिंह शेखावत, राष्ट्रीय अध्यक्ष राष्ट्रीय करणी सेना सहित अनेक अतिथि उपस्थित रहे।
साथ ही पद्मश्री रामकिशोर छीपा, पद्मश्री अहमद हुसैन, पद्मश्री मोहम्मद हुसैन, पद्मश्री गुलाबो सपेरा, पद्मश्री तिलक गिताई, पद्मश्री मुन्ना मास्टर, आईएएस रवि जैन और आईएएस शमित शर्मा, आरएएस पंकज ओझा, आरएएस प्रियंका जोधावत सहित कला, संस्कृति और प्रशासन जगत की हस्तियों की उपस्थिति रही।
मुख्य संयोजक शिव विनायक शर्मा ने कहा कि आयोजन का उद्देश्य मरू कोकिला सीमा मिश्रा की तीन दशक की साधना को सम्मानित करने के साथ राजस्थानी लोकगीत-संगीत और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना रहा। लोक कलाकारों को प्रोत्साहन देना और भाषा व संस्कृति के प्रति युवाओं में गौरव की भावना जागृत करना समय की आवश्यकता है।

नई पीढ़ी को विरासत से जोड़ने का रहा प्रयास:
इस अवसर पर 31 सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर को ‘नवपीढ़ी प्रेरणादूत सम्मान’ से सम्मानित किया गया। सम्मान से नई पीढ़ी को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने और सोशल मीडिया के जरिए राजस्थानी कला व परंपराओं को पहचान दिलाने का संदेश दिया गया।
वहीं परिचर्चा में राजस्थानी लोकगीत-संगीत की परंपरा, वर्तमान चुनौतियों और लोक संस्कृति के संरक्षण में नई पीढ़ी की भूमिका पर विचार-विमर्श हुआ। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समारोह को यादगार बना दिया।
समारोह ने संदेश दिया कि राजस्थानी भाषा व राजस्थानी लोकसंगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि प्रदेश की पहचान,परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की धरोहर है, जिसे संरक्षित कर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
