@ कोलकाता पश्चिम बंगाल :-
पश्चिम बंगाल में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए माहौल अभी से गर्म हो गया है। सीएम ममता बनर्जी और उनकी पार्टी टीएमसी कई बार ईवीएम पर सवाल उठा चुकी है।

ईवीएम को लेकर उठ रहे सवालों को दूर करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की गहन जांच का आदेश दिया है, ताकि निष्पक्षता और विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके। इसी कड़ी में ईवीएम की फर्स्ट लेवल चेकिंग (FLC) के लिए पांच वरिष्ठ नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है।
ये सभी अधिकारी पश्चिम बंगाल के बाहर के राज्यों से हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए लिया गया है।बाहरी राज्यों से क्यों बुलाए गए अधिकारी?
पश्चिम बंगाल के चुनाव राजनीतिक रूप से संवेदनशील माने जाते हैं। लोकसभा चुनाव और पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान भी हिंसा की कई घटनाएं हुई थीं। प्रशासनिक पक्षपात के आरोप भी राजनीतिक दल लगाते रहते हैं। इन्हीं आशंकाओं को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने दूसरे राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी है।
इसे आयोग की ‘चेक एंड बैलेंस’ नीति के रूप में देखा जा रहा है। चुनाव आयोग ने एक बयान में कहा कि ईसीआई ने ऐसे नियम भी लागू किए हैं जिनके तहत मतदान की पारदर्शिता बढ़ाने के लिए प्रत्येक उम्मीदवार की तस्वीर ईवीएम पर प्रदर्शित की जाएगी।बयान के अनुसार, इन पांच नोडल अधिकारियों को विधानसभा चुनावों के लिए विभिन्न एफएलसी स्थलों पर पर्यवेक्षकों के रूप में नियुक्त किया गया है।
नियुक्त किए गए अधिकारियों में शिनिया कयेम मिजे (उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी, अरुणाचल प्रदेश), योगेश गोसावी (उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी, महाराष्ट्र), पी के बोरो (अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी, मेघालय), एथेल रोथांगपुईई (संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी, मिजोरम) और कनिष्क कुमार (अवर सचिव, ईसीआई) शामिल हैं।
वर्ष 2021 के चुनाव में पश्चिम बंगाल में 80,000 से अधिक बूथ थे। निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि गणना के बाद बूथ की संख्या 10,0000 से अधिक होने की संभावना है।

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